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Shayari, poems and thoughts in Hindi and Urdu

 चाहने वाला हूँ तेरा, देख ले दर्द ज़रा;

तू जो वेइखे एक नज़र कारा लखान दा शुक्र सोहनीये!

देख तू कह के मूझे , जान भी दे दूंगा तुझे;

तेरा ऐसा हूँ दीवाना, तुने अब तक ये ना जाना हीरीए !!!

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सरकार शराब बेचकर जिनको गेहूँ चावल बाँटती है वही लोग गेहूँ चावल बेचकर शराब ख़रीद लेते हैं।
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वक्त की यारी तो हर कोई करता है मेरे दोस्त, मजा तो तब आये जब वक़्त बदल जाये, और यार ना बदले !
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हम नेकीया उस उम्र में करते हैं जब गुनाह करने के काबिल नहीं रहते हैं
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Kyun na badlu main, tum wahi ho kya?
Chalo galat hu main, tum sahi ho kya?
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विकराल नहीं ये चक्र समय का 
कमजोर तुम्हारा हृदय हो रहा है
लहरें तो निभा रही हैं धर्म अपना 
आत्मबल तुम्हारा धैर्य खो रहा है
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"Na hone ka ehsaas sabko hai, 
Maujudgi ki qadar kisi ko nahi..”
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कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ कि खुदा नूर भी बरसाता है आज़माइशों के बाद
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Aadhe dosto ne toh isliye dosti tod di q ki mai ameer nahi hu
...
वैसे ही कुछ कम नहीं थे बोझ दिल पर और ये दर्जी भी जेब बायीं ओर सिल देता है
...
बुल्लेशाह कहते हैं

"पढ़ पढ़ किताबां इलम दियां, तू नाम रख लेया काजी. हथ विच फड़ के तलवार, तू नाम रख लेया गाजी. मक्के मदिना घुम के, तू नाम रख लेया हाजी. बुल्लेशाह हासिल की किता, जे तू यार न रखया राजी"...

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"ठीक हूँ" सबसे कहता है, मुस्काते सबको ठगता है, यूँ तो भीड़ से घिरा रहता है पर सब खाली-खाली लगता है।
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2) आ सोनी तेनू चाँद की मैं चूड़ी पहरावा,

मैनू कर दे इशारा ते मैं डोली ले आंवा !!!
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3)

لہو سے سینچا تھا جس نے ہر ایک پودے کو۔ اُسی کے واسطے افسوس کوئی پھول نہیں ، اسد رضا 
लहू से सींचा था जिसने हर एक पौदे को उसी के वास्ते अफ़सोस कोई फूल नहीं- असद रज़ा

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4)
پھر تاج محل کوئی تعمیر نہیں ہوگا۔ ہر عہد کی شہزادی ممتاز نہیں ہوتی ، عرفان جلال پوری 
फिर ताजमहल कोई तामीर नहीं होगा-हर अहद की शहज़ादी मुमताज़ नहीं होती 
- अरफान जलालपुरी
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5)
پھول ہی پھول تھے بکھرے ہوئے تاحد نظر میں تری یاد میں جس راہ سے ہو کر گزرا، رند ساغری 
फूल ही फूल थे बिखरे हुए ताहद्दे नज़र-मैं तिरी याद में जिस राह से होकर गुज़रा - रिन्द सागरी
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6)
اپنی آنکھوں کے چراغوں کو بجھا دیتا ہوں۔ جب کسی گھر کو جلاتے ہیں تیرے شہر کے لوگ ، قمر رئیس 
अपनी आंखों के चिरागों को बुझा देता हूँ-जब किसी घर को जलाते हैं तेरे शहर के लोग- कमर रईस
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7) مجھ کو بھلا سکو تو بھلا دو بصد خوشی ۔ لیکن کبھی کبھی میں بہت یاد آؤں گا ، صلاح الدین منیر 
मुझको भुला सको तो भुला दो बसद खुशी-लेकिन कभी कभी मैं बहोत याद आऊंगा- सलाहुद्दीन मुनीर
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8)
راستو کیا ہوئے وہ لوگ جو آتے جاتے میرے آداب پہ کہتے تھے کہ جیتے رہیئے، اظہر عنایتی 
रास्तो क्या हुए वो लोग जो आते जाते-मेरे आदाब पै कहते थे के जीते रहिए- अज़हर अनायती
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9)
میرے وجود کو دامن سے جھاڑنے والے ۔ جو تیری آخری منزل ہے میں وہ مٹی ہوں ، شبنم وحید 
मेरे वजूद को दामन से झाड़ने वाले जो तेरी आखरी मंज़िल है मैं वो मिट्टी हूँ - शबनम वहीद
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10)یہ تو سنتا ہے کوئی اور کھلونا لیں گے۔ میرے بچے بھی سمجھنے لگے قیمت میری ، مہدی نظمی ये तो सस्ता है कोई और खिलौना लेंगे- मेरे बच्चे भी समझने लगे कीमत मेरी- महदी नज़मी
11)
گر چاہتا ہے بانٹنا اپنے دکھوں کا بوجھ پہلے پرائی آگ کے شعلوں میں جل کے دیکھ ، عالم قریشی गर चाहता है बांटना अपने दुःखों का बोझ पहले परायी आग के शोलों में जल के देख - आलम कुरैशी
12)

تجھ سے بچھڑ گیا ہوں تو محسوس یہ ہوا ۔ اک شاخ تھا شجر سے جدا ہوگیا ہوں میں ، صغیر احمد ہونے جدا तुझ से बिछड़ गया हूँ तो माहसूस ये हुआ-इक शाख था शज़र से जुदा हो गया हूँ मैं- सगीर अहमद सूफी

13)قتل ہوتے تو مجھے شہر میں دیکھا سب نے کوئی پہنچانہ عدالت میں گواہی کے لئے ، رئیس انصاری कत्ल होते तो मुझे शहर में देखा सबने-कोई पहुँचा ना अदालत में गवाही के लिए - रईस अन्सारी

یہ کیس کے خون کا دھتا ہے ساحر - جسے ہم گنگا جل سے دھو ر ہے ہیں ، ساحر ہو شیار پوری

ये किसके खून का धब्बा है साहिर-जिसे हम गंगा जल से धो रहे हैं- साहिर होश्यारपुरी

تم جو آئے تو مرے گھر میں اُجالا پھیلا۔ اس قدر ورنہ حسیں رات کہاں تھی پہلے ، سیفی سر نچھے तुम जो आए तो मिरे घर में उजाला फैला-इस कदर वरना हसीं रात कहां थी पहले- सैफी सिरौंजी
اُٹھا کے لے گئے سب لوگ مجھ کو سولی تک۔ میں چیختا رہا یا رو مرا بیاں لے لو، اظہر غوری उठा के ले गए सब लोग मुझ को सूली तक मैं चीखता रहा यारो मेरा बयां ले लो - अजहर गौरी

بہت ممکن ہے ان میں سے کوئی ہیرا نکل آئے گلی کوچے کا ہر تھر اٹھا کر دیکھ لیتا ہوں ، شاہد کبیر
 बहोत मुमकिन है इनमें से कोई हीरा निकल आए-गली कूचे का हर पत्थर उठा कर देख लेता हूँ- शाहिद कबीर
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समय जिसका साथ देता है वो बड़ों बड़ों को मात देता है... अमीर के घर पर बैठा कौवा भी सबको मोर लगता है और गरीब का भूखा बच्चा भी सबको चोर लगता है... इंसान की अच्छाई पर सब खामोश रहते हैं, चर्चा अगर उसकी
बुराई न हो तो गूंगे भी बोल पड़ते हैं !
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वो बिल्कुल ठीक हैं अपनी जगह बस हम ही ज़रूरत से ज्यादा उम्मीद कर बैठे..!!
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तेरे गिरने मे, तेरी हार नहीं। तू आदमी है, अवतार नहीं ॥ गिर, उठ, चल, दौड़, फिर भाग, क्योंकि जीत संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं।
- साहित्य साथी
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आग लगाने वालों को क्या खबर, 
रूख हवाओं ने बदला तो ख़ाक वो भी होंगे..!
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सारी उम्र तुझे मेरी कमी रहे 
ख़ुदा करे तेरी उम्र बहुत लम्बी रहे
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आज टूट गया तो बचकर निकलते हो, कल आइना था तो रुक-रुक कर देखते थे.
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अगर जो पूछो अपनी अहमियत मुझसे, तो सुनी?
एक तुमको जो चुरा लूँ तो ज़माना गरीब हो जाए..!
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तुम ने बदले हमसे गिन गिन के लिये हमने क्या चाहा था इस दिन के लिये
दाग़ देहलवी | शब्दों के पंख
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थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में, कैद में रह कर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है.!!
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जिंदगी को कभी तो खुला छोड़ दो जीने के लिए, क्योंकि बहुत संभाल के रखी चीज़ वक़्त पर नहीं मिलती..!
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पेड़ काटने आये है कुछ लोग मेरे गांव में अभी धूप बहुत तेज है कहकर बैठे है उसकी छाँव में
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अच्छे दिन के चक्कर में उम्र गुजर जाती है, फिर पता चलता है कि जो गुजर गए वही अच्छे दिन थे...!
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बुरे वक्त में भी जो तुमसे जुदा ना हो उसे गौर से देखना कही ख़ुदा ना हो
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حکمران جن کے سر پر مکھی بھی نہیں بیٹھتی وہ معاشرے کے بھوکے ننگے غلاظت کے ڈھیر پر بیٹھے لوگوں کا درد کیسے سمجھ سکیں گے

Hukmaraan jin ke sar par makkhi bhi nahin baithti woh muashre ke bhooke nange ghalazat ke dher par baithe logon ka dard kese samajh sakenge.
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कुछ पंख तो तोड़, ये जंज़ीरें मरोड़, कहीं भी उड़, बस अब इस पिंजरे को तोड़।
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अपनी कल्पनाओं का उल्लेख सिर्फ़ मुझमें है, अनेक हूँ मैं सबसे पर एक सिर्फ़ मुझमें है!

- विकास यदुवंशी
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मैंने परखा है.. अपनी बदकिस्मती को, मैं जिसे अपना कह दूँ.. वो फिर मेरा नहीं रहता..!!
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जिसकी नैया तैरती, बैठे सब उस संग। जो फँसता मझधार में लड़े अकेला जंग ।
आशा खत्री 'लता'
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जहर का भी अपना हिसाब है, 
मरने के लिए जरा सा, 
और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है..!

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संग ना करो राजा का पता नहीं कब रुला दे 
संग करो फकीरों का क्या पता कब खुदा से मिला दे|
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चलो कह देते हैं साफ-साफ, कशमकश में क्या रहना? 
नए भी अच्छे ही हैं, पर पुराने दोस्तों का क्या कहना।
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उन्हीं के गीत ज़माने में गाए जाएँगे, 
जो चोट खाएँगे और मुस्कुराए जाएँगे।
Kaleem Ajiz

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Reading all books in the world. won't make you wise. Learning the language of love. makes for a true scholar.

Pothi padhi padhi jag mua.
pandit bhaya na koi.

Dhai aakhar prem ka.
padhe so pandit hoye.

पोथी पदि परि जग मुग्रा. पंडित भया न कोय। दाई आखर प्रेम का. पढ़े यो पंडित दोय ॥
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